Narendra Modi
नरेंद्र मोदी फ़ैक्ट्स

नरेंद्र मोदी 2014 के आम चुनाव में भारत का प्रधानमंत्री बन गया। इधर उस पर जानकारी और विश्लेषण (analysis) हैं।


मुसलमान/ अल्पसंख्यक/ दलितों के बारे में मोदी क्या कहता है?

मिसाल के लिए ये है मोदी के कुछ राय:
• 2002 के गुजरात हिंसा के तुरंत बाद हिंसा के पीड़ित मुसलमानों के लिए बनाए गए कॅम्पों को मोदी ने "बच्चे पैदा करने के कारखाने" कहा था। उसी भाषण में मोदी ने "हम पाँच, हमारे पच्चीस" शब्दों का इस्तेमाल किया - मतलब यह कि मुसलमान परिवार में एक आदमी, चार बीबी और पच्चीस बच्चे होते हैं, और मुसलमानों की आबादी तेज़ी से बढ़ रही है (सच्चाई यह है कि गुजरात में 1951 में 8.9% लोग मुसलमान थे और नए आंकड़े के अनुसार 9.1% हैं)।
• 2002 की एक और घटना में मोदी ने जे एम लिंगडोह (भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त) के बारे में यह संकेत किया कि वह गुजरात विधानसभा चुनाव में‌ देरी कर रहे है क्योंकि वह ईसाई है। यह भी संकेत किया कि वह भारतीय नहीं है (लिंगडोह मेघालय का है)।
• जुलई 2013 में 2002 हिंसा के बारे में पूछे जाने पर उसने कहा "अगर कोई कुत्ते का बच्चा भी आपकी कार के नीचे आकर मारा जाता है तो आपको दुख होता है."
नवसर्जन ट्रस्ट द्वारा 2009 में किए गए जाँच में यह पाया गया कि गुजरात में दलितों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव होता है, और उनके खिलाफ़ आम तौर पर हिंसा होती है (यहाँ भी देखें)। लेकिन मोदी के अनुसार दूसरों का मल ढोने, और पाखाना साफ करने वाल्मिकी समुदाय के लिए 'आध्यात्मिकता का अनुभव' है। उनका कहना था कि "किसी वक्त उन्हें यह प्रबोधन हुआ होगा कि वाल्मिकी समुदाय का काम है कि समूचे समाज की खुशी के लिए काम करना, इस काम को उन्हें भगवान ने सौंपा है"
• एक और साक्षात्कार में मोदी ने कहा: "मैं हिंदु-सिख को नहीं बाँटना चहता हूँ, हिंदू-इसाई को नहीं बाँटना चाहता हूँ..." मुसलमानों का ज़िक्र नहीं किया।
• 2012 में मोदी ने उर्दू साप्‍ताहिक नई दुनिया के संपादक, शाहिद सिद्दीकी, से एक साक्षातकार में मोदी ने कहा: "आज कल आप लोगों के मुँह में भी पानी आ रह है। वो इस लिए के आप अखंड भारत के नाम पर मुस्लिम अकशरियती देश बनाना चाहते हैं"

आने वाले चुनाव में बीजेपी मुस्लिम मतों को जीतने की कोशिश कर रही है। सवाल है कि इस में सचमुच उनका रुख बदला है या सिर्फ़ गठबंधन की राजनीति का एक उपाय है, और मुस्लिम और "माडरट" वोट जीतने की कोशिश? मधु किश्वर जैसे मोदीवादियों के अनुसार मोदी कभी भडकाऊ भाषण नहीं देता है। लेकिन यहाँ दिए गए मिसाल और अन्य जगहों पर भी किए गए जाँच से यह पता चलता है कि मोदी शब्दों का सोच कर इस्तेमाल करता है (यहाँ और यहाँ भी देखिए)। लेकिन मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के बारे में उसकी राय उसके साथियों को अच्छे से समझ में आती है।