Narendra Modi
नरेंद्र मोदी फ़ैक्ट्स

नरेंद्र मोदी 2014 के आम चुनाव में भारत का प्रधानमंत्री बन गया। इधर उस पर जानकारी और विश्लेषण (analysis) हैं।


क्या मीडिया मोदी के खिलाफ़ हैं?

मोदीवादी अक्सर कहते हैं कि मीडिया मोदी के खिलाफ़ है। नरेंद्र मोदी ने खुद कहा है: "मीडिया ने मेरे खिलाफ़ झूठ फैलाने का ठेका लिया हुआ है"। यह सच है कि टीवी और इंटरनेट पर आलोचकों और समर्थकों दोनो से मोदी को काफ़ी कवरेज मिलता है। गूगल खोज के पहले पेज पर मोदी की कई प्रचार साईटें हैं। इसके अलावा कुछ निष्पक्ष और कुछ समर्थक कहानियाँ, और मोदीवादियों द्वारा बनाई गई साईटें भी हैं। लेखों पर अधिकांश टिप्पणियाँ (कॉमेंट्स) अक्सर मोदिवादियों द्वारा लिखी जाती हैं। और ये हिंदुत्ववादी "साइबर एक्टीविस्ट्स" ट्विटर पर बहुत सक्रिय हैं। जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, मोदी का आलोचन करने वाले पत्रकारों को धमकी और दबाव से चुप किया जा रहा हैं। इसमें मीडिया मैनेजरों का भी हाथ होता है, जो मोदी के प्रधानमंत्री बनने की तैयारी में उससे दुश्मनी नहीं लेना चाहते हैं।

मोदी के प्रशंसकों में ऐसे लेखक भी सम्मिलित हैं जो संघ परिवार से जुड़े हुए नहीं हैं, पर जो मोदी के "शक्तिशाली नेता" का इमेज से प्रभावित होते हैं। मीडिया में ऐसी कई कहानियाँ मिलती हैं जिनमें झूठे तथ्यों के इस्तेमाल से मोदी की बढ़ाई की जाती है या मोदी के झूठे दावे को बिना किसी जाँच के पेश की जाती है। बड़े मीडिया में मोदी से दृढ़ सवाल शायद ही कभी पूछे जाते हैं। इसका कारण शायद इस साक्षात्कार में देखा जा सकता है - करण थापर द्वारा मुश्किल सवाल पूछे जाने पर मोदी उठकर चला जाता है

वास्तव में ऐसा लगता है कि "मीडिया मोदी के खिलाफ़ है" यह कहानी मोदी के पीआर मशीन द्वारा बनाई गई है। मिसाल के लिए मोदी की तरफ़दारी में मधु किश्वर ने एक लंबा लेख लिखा, जिसमें बहुत सारी ग़लतियाँ भी थीं। किश्वर ने यह भी कहा कि मोदी के खिलाफ़ एक "नफ़रत का अभियान" चलाया गया है। पर बाद में मालूम पड़ा कि किश्वर मोदी के प्रशंसक तब बन गई जब मोदी के पीआर मशीन द्वारा उसे मोदी के साथ "लंच मीटिंग" पर बुलाया गया